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Sunday, 22 July 2012

माँ



जिंदगी की तपती भूप में एक साया पाया है मैंने.
जब खोली आंख तो अपनी माँ को मुस्कुराता हुआ पाया है मैंने..

जब भी माँ का नाम लिया.
उसका बेशुमार प्यार पाया है मैंने..

जब कोई दर्द महसूस हुई, जब कोई मुश्किल आई
उस पहलु में अपनी माँ का प्यार पाया है मैंने.

जगती रही वो रात भर मेरे लिए
जाने कितनी रातें जगाई है मैंने..

जिसकी दुआ से हर मुशीबत लौट जाये
ऐसा फरिस्ता पाया है मैंने..

मेरे हर फिकर को जानने वाली
मेरी जज्बातों को पहचानने वाली
ऐसी हस्ती पायी है मैंने..

मेरी जिंदगी सिर्फ मेरी माँ है
इसी के लिए तो
इसी के लिए तो जिंदगी की समां जला राखी है मैंने..

                                                                                   By:- ABHISHEK PRATAP SINGH

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