करना खुद को कुर्बान सिखाते है लेखक,
जीने के लिए कभी तुम्हे मरना नहीं परे,
मरकर भी जिन्दा रहना सिखाते है लेखक.
लिखने के लिए सरजमीं दिलाते है लेखक,
अमिट कुछ ऐसा लिखने सिखाते है लेखक,
तावारिफ पर ऐसा लिख दो,कुछ अपनी कलम से,
जो अब तक न लिख पायें हो कोई लेखक.
संसार के सुखों के लिए,दुःख उठाते है लेखक ,
खिले किसी चमन में फूल,कलम लगते है लेखक,
इंसानियत-ए-बेमिसाल दिखने जहा को,
बोझ औरों का,अपने सिर पर उठा लेते हैं लेखक.
By:- Abhishek Pratap Singh

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