घर से निकला था जब मैं,
एक अंधे को सरक पार कराया था जब मैं,
मुझे लगा की पंख लगा दे तो आसमां छू ले हम.
पढाई करने गया था जब ,
परीक्षा में प्रथम आया था जब मैं,
मुझे एहसास हुआ की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
हँसने वाले को तो सब हंसाते है,
रोने वाले को हंसाया था जब मैं,
दौरने वाले को तो सब दौराते है,
लंगरों को दौराया था जब मैं,
तब मैंने कहा पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
तैरने वाले को तो सब बचाते है,
डूबने वाले को बचाया था जब मैं,
तब मैं कहा की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
जब पंख लगाना ही है तो बरी लगाना ताकी
न उरने वालों को भी अपने साथ उरा ले जा सके हम.
आज फिर मैं कहूँगा की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
By:-Abhishek Pratap Singh
एक अंधे को सरक पार कराया था जब मैं,
मुझे लगा की पंख लगा दे तो आसमां छू ले हम.
पढाई करने गया था जब ,
परीक्षा में प्रथम आया था जब मैं,
मुझे एहसास हुआ की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
हँसने वाले को तो सब हंसाते है,
रोने वाले को हंसाया था जब मैं,
दौरने वाले को तो सब दौराते है,
लंगरों को दौराया था जब मैं,
तब मैंने कहा पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
तैरने वाले को तो सब बचाते है,
डूबने वाले को बचाया था जब मैं,
तब मैं कहा की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
जब पंख लगाना ही है तो बरी लगाना ताकी
न उरने वालों को भी अपने साथ उरा ले जा सके हम.
आज फिर मैं कहूँगा की पंख लगा दो तो आसमां छू ले हम.
By:-Abhishek Pratap Singh
No comments:
Post a Comment